जानिए सोमनाथ बाबा का इतिहास क्या था

, by kiran sharma

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहास-

सनातन हिंदू धर्म में 12 स्वयंभू शिव ज्योतिर्लिंगों का वर्णन किया गया है। जो भारत के अलग अलग स्थानों पर स्थित है,और सबका अपना महत्त्व और कथा है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों का एकसाथ उच्चारण करने के उद्देश्य से एक श्लोक भी प्रचलित है-
       " सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्री शैले मल्लिकार्जुनं। उज्जैनी महाकालोमकरं परमेश्वरं।।
          केदारं हिमपरिष्ठे डाकीयं भीमाशंकरं। वारणस्यचं विश्वेशं त्रियम्बकं गौतमीतटे।।
          वैद्यनाथं चित्तभूमौ नागेशं दारुकवनै। सेतुबन्धे च रामेशं घुश्मेचं शिवालय।।
          द्वादशेतानि नामानि प्रातरूथाय यः पठेतः। सप्तजनकृतं पापम स्मरेण विनश्यति।।
          यम यम कामंपैछेयेव पठिष्यन्ति नरोत्तमाः। तस्य तस्य फलप्राप्तिभृविष्यति नः संशयः।।"

somnath,images,pics

उपरोक्त श्लोक से ये स्पष्ट है की सभी में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग सबसे प्रथम है,जो स्थित है गुजरात राज्य के सौराष्ट प्रदेश में। भक्तो की यह मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। इसके सम्बन्ध में शिव पुराण में भी उल्लेख मिलता है,जो इस प्रकार से है-
    कहा जाता है कि जब प्रजापति दक्ष ने अपनी सभी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव के साथ कर दिया था तो उससे चंद्र देव अत्यंत प्रसन्न हुए थे। और वे सभी बहनें भी पति के रूप में स्वयं चंद्र को पाकर संतुष्ट थी,किन्तु चंद्रदेव को उन सभी में रोहिणी अधिक प्रिय थी,और वो उसी के साथ अपना अधिकांश समय व्यतीत करते इससे अन्य ने रुष्ट होकर अपने पिता की शरण ली। 
                                     दक्ष ने उनकी व्यथा सुनकर चंद्र से भेंट की और उन्हें समझाया कि "हे देव,तुमने तो एक उच्च और निर्मल कुल में जन्म लिया है,फिर भी तुम ऐसा भेदभाव क्यों करते हो। याद रखो जो भी अपने प्रियजनों इस प्रकार का विषमतापूर्ण व्यवहार करता है वो नरक का भोगी बनता है,इसलिए हे राजन अपने विचार और व्यवहार में सुधर करो,और उत्तम आचरण अपनाओ"। इस प्रकार प्रेम से समझकर दक्ष वापस चले गए। किन्तु चंद्र द्वारा बार-बार अवहेलना करने पर दक्ष ने उन्हें श्राप दिया की तुम्हें क्षय-रोग हो जाये। और उनके इस श्राप से चंद्रदेव को क्षय रोग हो गया,समस्त देवता चिंतित हो गए और श्रीब्रह्मा की शरण ली तब ब्रह्माजी जी ने कहा कि चंद्रदेव और अन्य सभी देवगण मिलकर प्रभास क्षेत्र(सौराष्ट्र) में निवास कर भगवन शिव की महामृत्युंजय मन्त्र के साथ आराधना करे,शिव के प्रसन्न होने पर वे श्राप से मुक्त  देंगे। और चंद्रदेव ने उसी अनुसार उक्त क्षेत्र में जाकर शिव की आराधना  शुरू की,और 6 मास की कठिन तपस्या के बाद शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें श्राप मुक्त कर वरदान दिया कि तुम्हारी कला दिन के एक पक्ष में कम होकर अगले ही पक्ष में निरंतर बढ़ती रहेगी और तुम लोकप्रिय और लोकसम्मान को प्राप्त करोगे। साथ ही शिव ने उनकी दृढ तपस्या और संकल्प को देख साकार लिंग रूप में प्रकट होकर सोमनाथ के नाम से प्रसिद्द हुए।
             सोमनाथ मंदिर का अनेक बार जीर्णोद्धार हुआ और अनेक बार आक्रमण भी। उन्ही आक्रमणों में से एक था महमूद गजनवी द्वारा किया गया आक्रमण। उनसे लगातार 17 बार इस मंदिर और क्षेत्र पर आक्रमण किये और यहाँ का विशाल और बहुमूल्य सोना और खजाना लूट कर अपने साथ ले गया।कहा तो ये भी जाता है कि यहाँ का प्राचीन शिवलिंग स्वर्ण का था जिसे गजनवी ने ले जाकर मक्का में जड़वा दिया।
    सोमनाथ में प्रतिदिन रात्रि में 7:30 से 8:30 तक साउंड एंड  लाइट शो चलता है,जिसमे सोमनाथ के इतिहास के बारे में बताया जाता है। श्रावण मास और शिवरात्रि में मंदिर की साज़-सज्जा बहुत ही मनमोहक और रमणीक होती है।
somnath,light,and,sound,show

                                

0 comments:

Post a Comment