रत्नों की पहचान कैसे करे

, by kiran sharma

रत्नों की पहचान कैसे करे 

कैसे करे रत्नों की पहचान कि कौन सा रत्न असली है और कौन सा नकली? असल में रत्नों की पहचान करना भी अपने आप में एक कला है, और कुछ विशेष और तकनिकी जाँच के माध्यम से ये जाना जा सकता है की ख़रीदा गया रत्न असली है या नहीं। 
                          रत्नों को उनके स्पेसिफिक इंडेक्स , हार्डनेस और चिल्स फ़िल्टर की सहायता से पहचाना जा सकता है। रत्नों के विशेषज्ञ विभिन्न तकनीको के प्रयोग से रत्न की गुणवत्ता का निर्धारण और पहचान करते है। जिन्हें खदान से निकाल कर तराश कर बाजार में बेचा जाता है उन्हें प्राकृतिक रत्न कहते है,और जिन्हें लैब में रसायनों और सिंथेटिक की मदद से बनाया जाता है उन्हें आर्टिफिशल जेम्स कहते है। इसलिए रत्न केवल अच्छी और गुणवत्तापूर्ण दुकान से उसका सर्टिफिकेट देख कर ही खरीदना चाहिए अन्यथा जिस दोष से मुक्ति के लिए रत्न धारण किया जा रहा है उसका कोई समाधान नहीं हो पाता। 
           रत्न को परखने का सबसे उत्तम बिंदु है उसका रंग और चमक, उदाहरण के लिए पुखराज खरीदते समय ये ध्यान दें वो गहरे पीले रंग का और स्क्रेच रहित हो अर्थात उसपर कोई निशान आदि न हो। उसी प्रकार यदि कोई पन्ना हलके हरे या किसी अन्य रंग में हो तो वो पन्ना हे ही नहीं।
                किसी भी रत्न को परखने का दूर अच्छा  तरीका है उसकी पारदर्शिता,किन्तु हर रत्न पारदर्शी हो ये अनिवार्य भी नहीं,उदाहरण के लिए लाल मूँगा और मोती दो ऐसे रत्न है जो पूर्ण रूप से अपारदर्शी है। किन्तु ७ अन्य रत्नों को उपरोक्त विधि द्वारा परख जा सकता है इसलिए रत्न की खरीद जहाँ तक संभव हो पर्याप्त प्रकाश में करे और उसे हर एंगल से जाँच कर ही ख़रीदे। यदि रत्न के आरपार देखने पर उसमे से बादल जैसा या किसी लकीर जैसा प्रतीत हो तो उसे न ख़रीदे। 
                             मोती रत्न के  बारे में एक बात ध्यान दे कि सरोत्तम कोटि का मोती आकर की तुलना में अपने से निम्न कोटि के मोती से छोटा ही प्रतीत होगा जैसे उच्च कोटि के २ ग्राम मोती का आकार साधारण कोटि के १ ग्राम मोती के बराबर ही होगा।



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