navatri me kare ye upaay

, by kiran sharma

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नवरात्री के 9 उपयोगी टोटके 

नवरात्री, सनातन हिन्दू धर्म का एक पवित्र और महत्वपूर्ण त्यौहार है । इस दिन माँ शक्ति के 9 रूपो की 9 दिनों तक आराधना कर अपनी मनोकामनाये पूर्ण की जाती है। कई लोग सच्चे मन से और सात्विकता के साथ माँ की आराधना करते है, तो कई ऐसे भी है जो टोने-टोटके और तंत्र विद्या का प्रयोग करते है। किन्तु अपनाया गया प्रत्येक टोटका गलत नहीं होता, बशर्ते भावना अच्छी और शुभ हो। 
                  नवरात्री में यदि कुछ विशेष टोटके कुछ आसान सी सावधानियों के साथ किये जाए तो जीवन की समस्त परेशानियों से मुक्त हुआ जा सकता है, और धन-वैभव की भी प्राप्ति होती है। तो आइये आज हम कुछ उपयोगी और आसान तरीको के बारे में इस लेख के माध्यम से जानते है-
  1. नवरात्री में यदि आप पूरे नौ दिनों का व्रत नहीं रख पाए तो कम से कम प्रथम और अंतिम दिवस का व्रत अवश्य रखे। 
  2. नौ दिनों तक मांस,मदिरा और काम-क्रोध से परहेज करे तो उत्तम होता है। 
  3. प्रथम दिन माँ के पूजन के बाद तीन गौमती चक्र और ग्यारह कौड़िया लेकर उसे एक लाल कपडे में बांधकर उसका हल्दी से अभिषेक करके अपने घर के पूजन स्थान पर रख दे। इससे माँ लक्ष्मी का घर में स्थाई वास होता है। 
  4. नवरात्री के अंतिम दिन यानि नवंमी के दिन विधि- विधान से हवन करके नौ कुँवारी कन्याओ को भोजन करवाये। 
  5. सूक्तक पाठ  कराये, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि जिस भी घर में नवरात्री के दिनों में सूक्त-पाठ किया जाता है उस घर में कभी भी आर्थिक संकट नहीं आता है। 
  6. परिवार में यदि सुहागन स्त्री नौ दिनों तक दुर्गा-[सप्तशती का प्रतिदिन पाठ करके कपुर और लौंग से माता की आरती करती रहे तो उस घर में सभी प्रकार के संकट जल्द ही दूर होने लगते है। 
  7. अष्टमी के दिन स्नान आदि के पश्चात् एक श्वेत आसान पर विराजित होकर पूर्व दिशा की और मुख करके बैठ जाए, और एक १०८ मनको वाली स्फटिक की माला का पूजन कर उससे लगातार ३१ बार निम्न मन्त्र का जाप करने से आर्थक संकट दूर होते है- ॐ ह्लीं वग्वादिनी भगवती मंम कार्य सिद्ध कुरुं कुरुं स्वाहाः 
  8. नवमी के दिन प्रातः शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का दूध,घी,केशर से अभिषेक करने से भी कष्टो से मुक्ति मिलती है। 
  9. पति-पत्नी में चल रहे कलह को दूर करने के लिए नवमी के दिन घी की १०८ आहुतिया अग्नि में देने से और निम्न मन्त्र का जप करने से ,दंम्पति के मध्य क्लेश खत्म होता है- ॐ शं शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंसनाय च लाभाय च पतिं/पत्नीम देहि कुरुं कुरुं स्वाहाः 

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