gayatri yantra and benifits

, by kiran sharma

गायत्री  यन्त्र और उसके फायदे 


ॐ भूर्भुव: स्व:तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न:प्रचोदयात्।  

एक शक्तिशाली और चमत्कारी मंत्र जो मुख्यतः समर्पित है देवी सावित्री को। इस मंत्र का सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है ऋग्वेद के दसवे मंडल में, और इस मन्त्र के जाप के लिए ३ प्रहर उचित बतये गए है, जो इस प्रकार है-
सूर्योदय होने के पूर्व अमृतवेला में, दोपहर के समय और तीसरा समय है सूर्यास्त के पूर्व। 
                                                उपरोक्त तीन प्रहर के अतिरिक्त यदि जाप करना है तो मौन रहकर करना चाहिए। गायत्री मंत्र का आध्यात्मिक अर्थ है कि सृष्टिकर्ता परमात्मा के तेजोमय प्रकाश का हम ध्यान करते है,और वह तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे। गायत्री मन्त्र के नियमित जाप से नेत्रो में चमक और बुद्धि कुशाग्र होती है और साथ ही अनेक सिद्धिया प्राप्त,होती है। इस मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए तथा जप की संख्या कम से कम १०८ होनी चाहिए। 
मन्त्र के नियमित जप से होने वाले लाभ-

  • त्वचा में चमक आना और तेज़ बढ़ना। 
  • मन में सकरात्मकता का बढ़ना। 
  • बुद्धि का कुशाग्र होना। 
  • मन्त्र के प्रभाव से पूर्वाभास की सिद्धि भी प्राप्त होती है।
चर्म रोगों से मुक्ति के लिए शुभ मुहूर्त देखकर घी,शहद और दूध को मिलाकर १००० गायत्री मंत्रो का अनुष्ठान कर आहुति देने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है। शत्रुओ पर विजय पाने के लिए ॐ क्लिं मन्त्र का 3 बार सम्पुट लगाकर गायत्री मन्त्र का जप करने से  शत्रुओ पर विजय मिलती है।

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