ganesh yantra ki sadhna se hogi kamna puri

, by kiran sharma

गणेश यन्त्र की साधना 

जीवन में मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए यंत्र साधना का चित्रात्मक उपयोग बहुत ही सार्थक सिद्ध होता है,और शीघ्र परिणाम देने वाला होता है। सभी यंत्रो में गणेश यन्त्र का अपना विशिष्ट महत्त्व है,ये यंत्र सबसे शुभ,कल्याणकारी और शक्तिशाली  माना गया है। श्रीगणेश को सभी देवो में प्रथम पूज्य,और विध्नहर्ता कहा गया है। हर कार्य में सफलता प्राप्त करने  के लिए श्रीगणेश की आराधना सबसे उत्तम और शीघ्र फल देने वाली है। 
गणेश यंत्र का विधि पूर्वक पूजन और आराधना करने से सभी कष्ट दूर होकर समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है। 
पूजन की विधि-
  यंत्र को  किसी भी प्रकार से प्रतिष्ठित किया जा सकता है, किन्तु स्थापना के पूर्व यन्त्र को गंगाजल से धोकर शुद्ध कर लेना चाहिए और इसकी स्थापना ईशान कोण में ही करना चाहिए,तत्पश्चात धुप-दीप जलाकर पुष्प अर्पित कर श्रीगणेश स्तुति का पाठ करना चाहिए। नित्य नियम से श्रीगणेश की आराधना और मंत्र जाप करने से मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है । यन्त्र के सामने गाय के शुद्ध घी से बने अन्न की आहूतिया देने से घर में समृद्धि की कमी नहीं होती।यंत्र की  स्थापना स्थल की पवित्रता और स्वछता का विशेष ध्यान रखे। 
जाप के लिए मन्त्र- " ॐ गं गणपतये नमः"
एक बात का विशेष स्मरण रखे की यंत्र का मुख पश्चिम दिशा की और रहे,और एक बार स्थापित हो जाने पर यंत्र को उद्यापन से पूर्व न उठाए। व्रत पूर्ण होने तक झूठ,छल आदि आदतों का त्याग करना उचित रहता है। 

पूजन का महत्त्व और लाभ -
 उपरोक्त बतायी गयी विधि से पूजा-आराधना करने से, मन से सच्ची श्रद्धा और विश्वास से पूजन आरम्भ करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है, और कई प्रकार की सिद्धियां स्वतः ही साधक को प्राप्त हो जाती है। इस यंत्र का पूजन और मन्त्र जप उचित और नियत संख्या में ही करना चाहिए,और उद्यापन के समय ब्राह्मणों को भोजन,दक्षिणा आदि देकर ही इसका तर्पण करना चाहिए। 
     यंत्र  पूजन से प्रतियोगिता में विजय, शत्रु पर विजय,कर्ज से छुटकारा, नवग्रह दोष अदि सभी की प्राप्ति हो जाती है। 




0 comments:

Post a Comment