chaarminar,hydrabaad

, by kiran sharma

हैदराबाद की चारमीनार 

भारत के हैदराबाद शहर में स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक ईमारत,"चारमीनार" . क़ुतुब वंश के सुल्तान कुली क़ुतुब शाह द्वारा 16 वीं शताब्दी में बनवाई गई थी चारमीनार, जो मूसी नदी के पूर्वी तट पर बसे शहर के मध्य में स्थित है। 
         चारमीनार, आज भारत के 10 प्रमुख प्राचीन ऐतिहासिक मीनारों में से एक है। इसके उत्तर में ४ प्रवेश द्वार भी है जिन्हें चार कमान के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि चारमीनार की डिजाईन और निर्माण के लिए विशेषतौर पर एक आर्किटेक्चर को संजरी फारस से बुलवाया गया था। चारमीनार की रचना एक मीनार नहीं,बल्कि एक मस्जिद के तौर पर की गई थी। लेकिन कुछ इतिहासकारो का मानना है की इसका निर्माण एक स्मारक के तौर पर किया गया था,जब सुल्तान द्धारा अपनी राजधानी को गोलकुंडा से हैदराबाद स्थानन्तरित किया गया।

                         चारमीनार,भारतीय-इस्लामिक शैली का अनुपम नमूना है। इसकी हर मीनार की उचाई एकसमान है और २० मीटर लम्बी और 55 मीटर ऊँची है। मीनार की हर दिशा में एक दरवाज़ा है,जो अलग-अलग दिशाओ में अलग-अलग बाजारों की तरफ खुलता है। प्रत्येक मीनार की छत पर एक गुम्बदनुमा गुम्बज निर्मित किया गया है,और साथ ही मीनारों पर बारीकी से नक्काशी भी की गई है। 
          चारमीनार के निर्माण के लिए संगमरमर,चुना पत्थर और ग्रेनाइट का इस्तमाल किया गया था,और इसके गुम्बदनुमा मेहराब को एक विशेष दुरी पर एक विशेष आकृति में डिजाईन किया गया था। इसकी बालकनी से पूरे शहर की ख़ूबसूरती को  निहारा जा सकता है। सबसे विशेष और आश्चर्यजनक बात ये कि इस मीनार के नीचे से एक सुरंग का निर्माण भी करवाया गया जो हैदराबाद को गोलकुंडा से जोड़ती है। इसका निर्माण आपात स्थितियों के उपयोग के लिए किया गया था। 
             ईमारत का पश्चिमी दरवाजा, पवित्र इस्लामिक तीर्थ मक्का की दिशा में खुलता है,जिसके निर्माण के पीछे सुल्तान की धार्मिक भावनाओ के प्रति आदर को कारण बताया जाता है। आज भी ईमारत की मुख्य हाल में हर शुक्रवार को सामूहिक इबादत की जाती है। सन 1889 में ब्रिटिश प्रशासन द्वारा मीनार की चारो दिशाओ में चार विशाल घड़िया लगवाई गई थी।
           ईमारत के मध्य में भी एक बड़ी मस्जिद है जिसके निर्माण के समय कुछ पत्थर और ईँटे मक्का से भी मंगवाई गई थी,ऐसी जनश्रुति है। ईमारत के उत्तर दिशा की और स्थित है हैदराबाद का सबसे पुराना " लाड-बाज़ार" जो अपने गहने और चूड़ियों के लिए विश्वविख्यात है।मोतियों के लिए यहाँ का गट्टी बाज़ार मशहूर है।
इतिहासकारो के अनुसार चारमीनार का इलाका एकमात्र ऐसा स्थान है जो शाही होने के बाद भी सबसे व्यस्त है।
   हैदराबाद, खाने के शौक़ीन लोगो के लिए तो एक स्वर्ग से कम नहीं है। यहाँ की हैदराबादी बिरयानी,स्टफ़ड कुलचा और हैदराबादी मुगलई चिकन देश ही नहीं विदेशो तक भी लोकप्रिय और मशहूर है। पेरिस में टावर और अमेरिका में लिबर्टी जितना प्रसिद्द है उतना ही भारत में चारमीनार है। रात के समय चारमीनार की ख़ूबसूरती देखते ही बनती है।

0 comments:

Post a Comment