मांडव(माण्डू) का इतिहास /history

, by kiran sharma

मांडव(माण्डू) का इतिहास 

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जहाज महल 
मांडवगढ़(मांडू) एक लोकप्रिय ऐतिहासिक पर्यटन स्थल, जो बसा है भारत की ह्रदय स्थली "मध्य प्रदेश " के विंध्यन पर्वत श्रंखला में । 
मांडव मध्य प्रदेश के धार जिले तथा इंदौर संभाग  के अन्तर्गत आता है जिसकी जिले से दुरी 40 कि.मि. और संभाग से दुरी कुछ 65 कि.मि.है और इसकी समुद्र तल से ऊँचाई करीब 200 फ़ीट है।    
    अपने प्राकृतिक सुंदरता और अदभुत सूंदर किलो के लिए विख्यात मांडव में कई देखने लायक स्थान है जैसे जहाज महल, हिंडोला महल, रूपमती महल, महादेव मंदिर, शाही बाग़।  
             मांडव को बनाने और बसाने का सर्वप्रथम श्रेय परमार राजाओ को जाता है।  इसे मुग़ल काल में शादियाबाद  के नाम से भी जाना जाता था क्योंकि यहाँ की ख़ूबसूरती देखते ही बनती है। अकबर के शासनकाल में यहाँ का सूबेदार बाजबहादुर था। मांडव, बाजबहादुर और रानी रूपमती की प्रणय गाथा के लिए भी प्रसिद्द था। जनश्रुति के अनुसार रूपमति और बाजबहादुर का प्रेम इतना सच्चा और गहन था की बाज के अतरिक्त और किसी भी अन्य के  बारे में रानी ने कभी नही सोचा और समय आने पर अपनी आन की रक्षा के खातिर रानी ने समर्पण करने के बजाय कूदकर प्राण त्याग देना उचित जाना। 
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रूपमती महल 
    मांडव के इतिहास के साथ एक अन्य जनश्रुति भी है की यहाँ स्थित रेवा कुंड में जो नर्मदा नदी का पानी है वो कभी सूखता नहीं और न ही कभी मैला होता है, और नर्मदा का वास्तविक उद्गम भी इसे माना जाता है और शायद इसीलिए इसके बारे में संस्कृत में एक श्लोक भी है कि-"नर्मदाय रेवा कुंदाय नमः"
           जहाज महल और शाही बाग़ का निर्माण मुग़ल सम्राट जहाँगीर ने 16 वीं शताब्दी में करवाया था। इसका स्थापत्य और ख़ूबसूरती बहुत ही रमणीक है। और महादेव मंदिर का निर्माण मुग़ल सम्राट अकबर महान ने करवाया था, जिस पर फ़ारसी में एक कलमा भी खुदवाया गया है।  यहाँ स्थित शाही महल का निर्माण गयासुद्दीन तुगलक ने अपनी 1500 बेगमो को रखने के लिए  करवाया था। एक कहानी तो यह भी है की शाहजहाँ को ताजमहल बनाने की योजना भी यहाँ के होशंगशाह के मकबरे को  देखकर आई। 
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होशंगशाह मकबरा 
                    मांडव के कुछ अन्य प्रचलित नाम भी है जैसे- मालवा का स्वर्ग, मध्य प्रदेश का कश्मीर, प्रेम नगरी।मांडव को शादियाबाद नाम गौरी सल्तनत के सुलतान दिलावर खा ने दिया था।  मालवा की मिट्टी के बारे में कहा जाता है कि- " मालवा की माटी है गहन गंभीर, पग-पग रोटी नी डग-डग नीर"। 



                                         

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