सच में उज्जैन महाकाल बाबा का इतिहास ऐसा था

, by kiran sharma

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उज्जैन महाकालेश्वर का इतिहास 

" अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का,काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाँकाल का"

 

  • विश्वप्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है उज्जैन स्थित स्वयंभू भगवन महाँकाल का दिव्य पवित्र मंदिर। 

  • भगवन शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा और एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। पुराणों में इस मंदिर से सम्बन्धित कई कथाए लिखी हुयी है। सच में  उज्जैन महाकाल बाबा ऐसा था 
                   
  • शिव पुराण के 16 वें अध्याय के अनुसार शिव के इस तृतीय लिंग के बारे में महाराज सूतजी कहते है की अवन्ति(उज्जैन) में एक ब्राह्मण(वेदप्रिय)का निवास था जो प्रतिदिन अग्निहोत्र यज्ञ किया करते तथा भगवन शंकर के परम भक्त भी थे।

  •  एक बार जब नगरी पर दैत्यों का आक्रमण हुआ तब एक अनोखी घटना घटित हुई। जब दैत्य, शिव भक्तो पर आक्रमण करने वाले थे तभी उस ब्राह्मण द्वारा पूजित मिटटी के लिंग के स्थान पर भयंकर रूपधारी भगवन शंकर प्रकट हुए,जिन्होंने उन दैत्यों को संहार कर भक्तो की रक्षा की। उसी स्थान पर आज जो शिवलिंग स्थित है वह वही महाकाल है,जिन्होंने उस दिन अपने भक्तो को काल से बचाया था।
                           
  • एक अन्य कथा के अनुसार, उज्जैन में एक प्रतापी और भक्त राजा चन्द्रसेन हुए। जिन्हें शाष्त्रो का गहन अध्ययन था।

  •  एक बार की बात है, जब सभी आसपास के राजाओ ने मिलकर एक चतुरंगिणी सेना बनाकर,तथा भरी सैन्यबल के साथ जब उज्जैनी पर आक्रमण

  •  किया तब राजा चन्द्रसेन भगवन शिव की शरण में पहुचे, और पूर्ण श्रद्धा के साथ उनकी आराधना शुरू की। उन्हें एक 5 वर्ष के बालक ने आराधना करते देख स्वयं भी आराधना करने का संकल्प किया और एक पत्थर लेकर उसकी यथाविधि पूजा कर उसने आराधना शुरू की। किन्तु माँ के द्वारा व्यवधान डाले और उस पत्थर को फेक देने से वो बालक बहुत ही दुखी हुआ तथा जिस स्थान पर वह पत्थर गिरा वहाँ महाँकाल का भव्य मंदिर खड़ा हो गया। जिसे देखकर शत्रुओ ने हिंसा को छोड़कर,मित्रता करने का प्रण लिया। 


  •  महाकालेश्वर(उज्जैन) बसा है पवित्र नदी "शिप्रा" के किनारे,जहाँ हर 12 वर्ष पश्चात् सिंहस्थ महाकुम्भ लगता है।
  • उज्जैन और भी कई कारणों से ही प्रसिद्द है,जैसे सम्राट विक्रमादिय के कारण, और ये भगवन श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली भी रही है। यहाँ के अन्य दर्शनीय स्थलों में- सांदीपनि आश्रम,हरिसिद्धि मंदिर,हनुमान मंदिर इत्यादि है।
  • यहाँ शासन करने वाले वंश थे- परमार,गुप्त,होल्कर,और सिंधिया।


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