amarnaath baba ki katha

, by kiran sharma

अमरनाथ की अमृत-कथा 

हिन्दुओ का पवित्र तीर्थ स्थल,और देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक अमरनाथ धाम। अमरनाथ स्थित है भारत के कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर से 135 किलोमीटर की दुरी पर,समुद्रतल से करीब 14000 फ़ीट की उचाई पर एक गहरी और 16 मी. चौड़ी गुफा में। भगवान् शिव के प्रमुख स्थानों में से एक है। अमरनाथ के बारे में कहा जाता है की इसी स्थान पर शिव ने पार्वती को अमरत्व का गहन रहस्य बतलाया था।
                       इस स्थान की सबसे बड़ी ख़ासियत है यहाँ का शिवलिंग,जो स्वयंभू होने के साथ साथ पूरी तरह बर्फ से बना हुआ है। श्रावण मास में यहाँ श्रद्धलुओ की संख्या सबसे अधिक रहती है।गुफा की कुल परिधि लगभग 150 फुट है। पूर्णिमा के समय शिवलिंग अपनी पूर्ण आकृति में होता है,वही अमावस्या के समय से पिघल कर आधे से भी कम रह जाता है। साधारणतया बर्फ की गुफाए कच्ची होती है,किन्तु इस गुफा की बर्फ पक्की और मोटी परत लिए है।
     मुख्य शिवलिंग से कुछ दूर ही गणेश और पार्वती के भी बर्फ से बनी कृतिया है।एक प्रचलित जनश्रुति के अनुसार इसी गुफा में  शिव ने पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी,जिसे कबूतरों के एक जोड़े ने भी सुन लिया था,और माना जाता है कि जिन्हें भी इस स्थान पर कबूतरों का जोड़ा दिखाए दे जाये उस पर  शिव की प्रत्यक्ष कृपा होती है,और मृत्यु उपरान्त वह शिवधाम को जाता है।अमरनाथ में कई दर्शनीय स्थल है जैसे- पिस्सू टॉप,अनंतनाग,शेषनाग स्थल। अमरनाथ का सबसे पहले एक मुस्लिम गड़रिये  को पता चला था,इसलिए मंदिर में आने वाला कुल चढ़ावे में से एक हिस्सा उस गड़रिये के वंशजो को मिलता है।
               अमरनाथ तक पहुचने के लिए दो रस्ते है,एक तो पहलगाम होते हुए  और एक रास्ता है सोनमर्ग से होते हुए। पहलगाम सेआगे की यात्रा पैदल अथवा कच्चे मार्ग द्वारा करनी पड़ती है। गुफा तक पहुचने के अंतिम 14 किलोमीटर का मार्ग अति दुर्गम और कठिन है,और सुरक्षा की दृष्टि से काफी संदिग्ध भी जिसकी प्रशासन कोई जिम्मेदारी नहीं लेता।
                  पहलगाम के बाद अगला पड़ाव होता है 8 किलोमीटर दूर चंदनबाड़ी में। रात्रि निवास के लिए कैंप और भोजन के लिए उचित व्यवस्था भी उपलब्ध रहती है। और अगले ही दिन शुरू करनी होती है पिस्सू-घाटी की चढ़ाई,जिसके बारे में कहा जाता है कि इसी स्थान पर देवताओ और दानवो के मध्य युद्ध हुआ था।
             अगला पड़ाव होता है शेषनाग में,और उसके बाद उससे 14 किलोमीटर दूर और अंतिम पड़ाव होता है पंचतरणी पर। पंचतरणी से गुफा का रास्ता केवल 4 मील ही शेष बचता है। 

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