घर में करे ये उपाय जिससे अचानक होगी धन की प्राप्ति

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घर में करे ये उपाय जिससे अचानक होगी धन की प्राप्ति 

दीपावली के दिन में अखंडित पिपल का पत्ता तोड़ लाये उसे पूजा स्थान पर लाकर  रख दे या  घर के किसी पवित्र  स्थान पर रख दे और अगले शनिवार को नया अखंडित पत्ता लाये और पुराने वाले पत्ते के स्थान पर रख दे और पुराने वाले पत्ते को पेड़ के नीच रख कर आजाये।   

 ये प्रक्रिया प्रत्येक शनिवार को करे ऐसा करने से आप आपने घर में लक्ष्मी की चंचलता को महसूस करेंगे और  घर  लक्ष्मी की कृपा को महसूस करेंगे 


आटे के लिए गेहू  शनिवार को  पिसवाने का नियम  बनाले संभव होतो दसवीं बार जब चक्की में गेहू डाले तो काला चना अवश्य डलवाये और हर शनिवार को किसी न किसी रूप में  अवश्य  ग्रहण करे 

यदि किसी काम से घर से जाना पड़े तो घर से निकलने से पहले झाड़ू पुछा अवश्य लगा ले अच्छे योग सयोग 
बनेगे 

चीटियों  आटे में शक्कर मिला कर  अवश्य खिलाये  और जितने भी चित्र भगवान के हमारे  स्थापित हो 
 उनकी आरती अवश्य उतारे 

धन सम्बन्धी कार्य के लिए अगर  रहे हे तो गणेश जी को पुष्प अवश्य अर्पित करे और उसमे से एक पुष्प अपने पास रखले काम बन जायेगा 
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क्या है सपने ? क्यों आते है सपने

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 क्या है सपने ? क्यों आते है सपने -

  • सपने अकसर हमारे दिन भर कार्य करने वाली क्रियाओ से जुड़े होते है 
  • कुछ लोगो का कहना होता हे की उन्हें सपने दिखाई नहीं देते 
  • वास्तव में उन लोगो को सपने दिखाई तो देते पर याद नहीं रहते और वे लोग वास्तव ज़िंदगी में भी किसी बात को लेकर गहरा अध्यन नहीं करते अर्थात ज्यादा सोचते नहीं है 
  • और कुछ  हे की हमें सपने बहुत आते हे स्वाभाविक सी बात हे वे लोग  सोचते 
  • बहुत से लोग किसी भी बात को लेकर गहरा अध्यन करते हे 

कुछ लोग सपनो को महसूस करते हे- 

  • सपनो को महसूस तब ही किया जाता हे जब हम किसी खुले स्थान पर सो रहे हे और  या फिर कही इस तरह की सही में घटना हो रही हो या होने वाली हो तो आभास हो जाता है और हम सपनो को महसूस कर सकते है

  • कुछ सपने इस तरह के  हे जिन्हे महसूस तो किया जा सकता है पर चाह कर भी अपने हाथ पैरो को नहीं  हिला सकते  हे और किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं कर सकते 








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आखिर क्या है पितृ दोष और क्यों होता है पितृ दोष

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आखिर क्या है पितृ दोष -

 

  • बहुत से लोग हे जो पितृ दोष से आशंकित रहते है। मृत्यु के पश्चात् मात्रक की आत्मा प्रेत योनि में समय व्यतीत करती  है इस प्रकार से आत्माओ का समय व्यतीत करना विश्राम काल कहलाता  है 

  • एक शरीर को छोड़ कर  दूसरे शरीर को धारण करने को भी आत्माओ का विश्राम काल कहा जाता  है जो की अपनी बहुत ही गहरी निंद्रा का समय होता है 


  •  इनमे  से कुछ आत्माये ऐसी होती है जो की अपने शरीर के प्रति इतना सममोहित होती  की दूसरा शरीर धारण नहीं करती है और इस तरह की  आत्माए आपने परिवार के मोह में बंध जाती है और इसे ही पितृ दोष कहते है 

  • ये आत्माए ईश्वर से कम प्रभावी नहीं होती है किन्तु अन्य आत्माओ से श्रेष्ठ होती है माना गया हे की ये आत्माये ईश्वर और आत्माओ के बिच की स्थिति होती है जो की  आपने परिवार के लिए हमेश शुभ सोचती है

  • ये आत्माये मृत्यु के पश्चात् अपने द्वारा छोड़े  गए अधूरे कार्यो को पूर्ण करने लग जाती है और अपने घर के बेटो और पोतो के द्वारा पूर्ण करवाती है और अपने परिवार को संकट से बचाती है और इन्ही आत्माओ के लिए हम श्राद करते है 
  •  श्राद में ये आत्माए अपने बेटो और पोतो के घर आमंत्रित करने के बाद भोजन ग्रहण करने जाती है और उन्हें भोजन के बाद शुभ आशीष देती है
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बहुत ही अच्छा वर मिलेगा अगर करेंगे ये वास्तु उपाय

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विवाह के लिए उपयोगी वास्तु उपाय 

कई बार अनेक गुण,और संस्कार होते हुए भी योग्य जीवन साथी का सही समय पर ना मिल पाना जीवन में बहुत तनाव उत्पन्न कर देता है। हर मनुष्य की कुंडली का सप्तम भाव विवाह और उससे सम्बन्धित मामलो के लिए उत्तरदायी होता है। किन्तु वास्तु शास्त्र में बताये हुए कुछ विशिष्ट उपायो को अपना कर विवाह सम्बन्धित सभी दोषो से मुक्त हुआ जा सकता है, जो इस प्रकार है -


  •  नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर नहाने से विवाह सम्बन्धी दोषो से मुक्ति मिलती है। 
  • अपने पास सदैव पीले रंग का कोई न कोई वस्त्र किसी भी रूप में एवं चाँदी का एक चोकोर आकृति का एक टुकड़ा सदैव साथ रखे। 
  • प्रत्येक बुधवार को भगवन श्री गणेश का पूजन करे और उस दिन नमक का सेवन करने से विशेष परहेज करे। 
  • शुक्ल पक्ष में, एक गमले में पीपल का पौधा लगाकर उसकी पूजा आरंम्भ करे। 
  • विवाह का प्रस्ताव लाने वाले मेहमानों का स्वागत  इस प्रकार करे कि उन्हें दरवाजा ना दिखाई दे। 
  • कन्या के लिए सुझाव है की, किसी कन्या के  विवाह में जाए तो उस दुल्हन के हाथो में सजी मेहँदी से अपना हाथ भी थोड़ा रंग ले। 
  • कभी कभी अँधेरे कमरे में अकेले न रहे। 
  • हर शाम को तुलसी और केले के पौधे के पास शुद्ध घी के दिए जलाए । 
  • प्रत्येक दिन नियम लेकर " दुर्गासप्तमी" का पाठ अवश्य करे। 
  • मांगलिक कन्या/कुमार हर मंगलवार को "श्री चण्डिका स्त्रोत" का तथा शनिवार को सूंदर-कांड का  भी पाठ करे। 
  • प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा और ताज़ा दूध और बिल्व पत्र चढ़ाए। 
  • जो भी उपाय करे पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करे,क्योकि सफलता के लिए सबसे प्रथम और अनिवार्य है विश्वास। 
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BEST top 5 happy status

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गुरु बिना ज्ञान नहीं और आत्मज्ञान के
बिना ख़ुशी टिकती नहीं
                                       
वन  विभाग की तरफ से कहना है की
पेड़ो  से भी उतना ही प्रेम करो जितना की
आप पेड़ो के निचे करते हो
खुश रहने का मतलब ये नहीं की सब कुछ ठीक चल रहा है
इसका मतलब तो ये है के मुश्किलों से उठ कर जीना सिख  लिया है
ख़ुशी के बारे में सोचते रहोगे तो खुश रहेगे
 दुःख के बारे में सोचते रहोगे हो तो हमेश दुःख में ही जिओगे

रौशनी चाँद से होती है सितारों से नहीं
अलार्म नींद से  है बिस्टेर से नहीं
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सच में उज्जैन महाकाल बाबा का इतिहास ऐसा था

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उज्जैन महाकालेश्वर का इतिहास 

" अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का,काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाँकाल का"

 

  • विश्वप्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है उज्जैन स्थित स्वयंभू भगवन महाँकाल का दिव्य पवित्र मंदिर। 

  • भगवन शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा और एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। पुराणों में इस मंदिर से सम्बन्धित कई कथाए लिखी हुयी है। सच में  उज्जैन महाकाल बाबा ऐसा था 
                   
  • शिव पुराण के 16 वें अध्याय के अनुसार शिव के इस तृतीय लिंग के बारे में महाराज सूतजी कहते है की अवन्ति(उज्जैन) में एक ब्राह्मण(वेदप्रिय)का निवास था जो प्रतिदिन अग्निहोत्र यज्ञ किया करते तथा भगवन शंकर के परम भक्त भी थे।

  •  एक बार जब नगरी पर दैत्यों का आक्रमण हुआ तब एक अनोखी घटना घटित हुई। जब दैत्य, शिव भक्तो पर आक्रमण करने वाले थे तभी उस ब्राह्मण द्वारा पूजित मिटटी के लिंग के स्थान पर भयंकर रूपधारी भगवन शंकर प्रकट हुए,जिन्होंने उन दैत्यों को संहार कर भक्तो की रक्षा की। उसी स्थान पर आज जो शिवलिंग स्थित है वह वही महाकाल है,जिन्होंने उस दिन अपने भक्तो को काल से बचाया था।
                           
  • एक अन्य कथा के अनुसार, उज्जैन में एक प्रतापी और भक्त राजा चन्द्रसेन हुए। जिन्हें शाष्त्रो का गहन अध्ययन था।

  •  एक बार की बात है, जब सभी आसपास के राजाओ ने मिलकर एक चतुरंगिणी सेना बनाकर,तथा भरी सैन्यबल के साथ जब उज्जैनी पर आक्रमण

  •  किया तब राजा चन्द्रसेन भगवन शिव की शरण में पहुचे, और पूर्ण श्रद्धा के साथ उनकी आराधना शुरू की। उन्हें एक 5 वर्ष के बालक ने आराधना करते देख स्वयं भी आराधना करने का संकल्प किया और एक पत्थर लेकर उसकी यथाविधि पूजा कर उसने आराधना शुरू की। किन्तु माँ के द्वारा व्यवधान डाले और उस पत्थर को फेक देने से वो बालक बहुत ही दुखी हुआ तथा जिस स्थान पर वह पत्थर गिरा वहाँ महाँकाल का भव्य मंदिर खड़ा हो गया। जिसे देखकर शत्रुओ ने हिंसा को छोड़कर,मित्रता करने का प्रण लिया। 


  •  महाकालेश्वर(उज्जैन) बसा है पवित्र नदी "शिप्रा" के किनारे,जहाँ हर 12 वर्ष पश्चात् सिंहस्थ महाकुम्भ लगता है।
  • उज्जैन और भी कई कारणों से ही प्रसिद्द है,जैसे सम्राट विक्रमादिय के कारण, और ये भगवन श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली भी रही है। यहाँ के अन्य दर्शनीय स्थलों में- सांदीपनि आश्रम,हरिसिद्धि मंदिर,हनुमान मंदिर इत्यादि है।
  • यहाँ शासन करने वाले वंश थे- परमार,गुप्त,होल्कर,और सिंधिया।


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रत्न और गृह ज्योतिष एवं नक्षत्र शास्त्र

, by kiran sharma

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रत्न और गृह ज्योतिष एवं नक्षत्र शास्त्र 

जिस प्रकार हमारे जीवन में घर,गाडी और पैसा बहुत महत्त्व रखते है ठीक उसी प्रकार से गृह और नक्षत्रो का भी उतना ही महत्त्व है. यही मुख्य किरदार निभाते हमारे भाग्य को बनाने और बिगड़ने में. इन नक्षत्र रत्नों को धारण करने से हम अपने भाग्य में आ रही बाधाओ से मुक्त हो सकते है. हमारी राशि और लग्न में समस्त गुण-दोष समाये हुए है और किसी भी व्यक्ति की आयु,स्वास्थ्य और धन से इनका गहरा नाता होता है.
      यदि अपनी राशि अनुसार धारण न करके विपरीत रत्न धारण किया जाए तो ये कष्टो को बढ़ा भी देते है. अतः ये जान लेना आवश्यक है की जो रत्न आप धारण करने जा रहे है वो आपके लिए कल्यणकारी है या कष्टकारी।
ratna,images,photos,picsतो आइये जानते है 12 राशियों और उनसे सम्बन्धित रत्नों के बारे में -
कुल रत्न= 09 ( माणिक्य,मोती,मूँगा,पन्ना,पुख़राज,हीरा,नीलम,राहु एवं केतु)
कुल राशियाँ= 12 ( मेष,वृष,मिथुन,कर्क,सिंह,कन्या,तुला,वृश्चिक,धनु,मकर,कुंभ,मीन)

     माणिक्य रत्न का प्रभाव -
                                         
मेष राशि- इस राशि के जातकों के लिए ये रत्न सबसे उत्तम है,विशेषकर सूर्य की महादशा होने पर ये रत्न अपने  संपूर्ण फलदायक स्वरूप में होता है।
वृष राशि- इस राशि के जातक के लिए सर्वथा वर्जित रत्न है,सूर्य की महादशा होने पर विपरीत और कष्टकारी    परिणाम देने वाला है।
मिथुन- मिथुन राशि वालो को ये रत्न केवल एक निर्धारित समय में और निर्धारित समय तक ( सूर्य महादशा) तक ही धारण करना चाहिए।
कर्क- कर्क राशि के लिए भी यह रत्न हितकारी परिणाम देने वाला है,इसे धारण करने से ग्रह एवं स्वास्त्य सम्बन्ध समस्याओ से निजात मिलती है।
सिंह- सिंह राशि के लिये माणिक्य रत्न बहुत ही उत्तम और अनिवार्य माना जाता है,इससे शारीरक और मानसिक संतुलन बना रहता है ,और शत्रुओ पर विजय मिलती है।
कन्या- कन्या राशि के लिए ये रत्न विपरीत परिणाम देने वाला होता है।
तुला- केवल एक निर्धारित दशा में ही धारण करना उत्तम होता है।
वृश्चिक- मंगल इस राशि का स्वामी है,अतः ये रत्न इन राशि के जातको के लिए कल्याणकारी है।
धनु- माणिक्य रत्न इन राशि के जातक के लिए भी हितकारी माना गया है।
मकर-  विपरीत फल देने वाला कहा गया है,अतः इस राशि के लिए ये रत्न अशुभ है।
कुम्भ- माणिक्य धारण करने से भारी हानि की सम्भावना रहती है।
मीन-  केवल सूर्य दशा की स्थिति में धारण योग्य है।

        मोती रत्न का प्रभाव- 

मेष- धन प्राप्ति तथा समृद्धि देने वाला।
वृष- इस राशि के लिए वर्जित रत्न है,पूर्ण हानिकारक।
मिथुन- ज्योतिष परामर्श पर तथा अति विशेष परिस्थितियों में धारण योग्य।
कर्क- अति शुभ और प्रत्यक्ष फल देने वाला, धारण योग्य अनिवार्य रत्न।
सिंह-  इस राशि के लिए शुभ और उत्तम रत्न।
कन्या-धन, यश,और संतान सुख देने वाला है, अतः इस राशि के जातक के लिए धारण योग्य है।
तुला- यश और गौरव की प्राप्ति करने वाला माना गया है।
वृश्चिक- भाग्य उन्नत करने वाला और यश में वृद्धि करने वाला है, अतः धारण योग्य।
धनु-इस राशि के लिए ये रत्न धारण करना  वर्जित है,हानिकारक और अहितकारी है।
मकर- गृह-क्लेश और वाद बढ़ाने वाला,अधारणीय माना गया है।
कुम्भ- धारण योग्य नहीं, धन और यश की हानि करने वाला माना गया है।
मीन- धारण योग्य, यश,धन और विद्या की वृद्धि करने वाला कहा गया है।

       मूँगा रत्न का प्रभाव-
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मेष-  धारण योग्य, धन, यश,और गौरव की प्राप्ति करने वाला माना गया है।
वृष-इस राशि के लिए वर्जित रत्न है, पूर्ण हानिकारक और अशुभ है।
मिथुन-  इस राशि के लिए अशुभ और वर्जित रत्न है।
कर्क- धारण योग्य तथा मूँगा और मोती एकसाथ धारण करे तो और भी उत्तम  फल देने वाला है।
सिंह-  धारण योग्य तथा अनिवार्य रत्न, धन, यश,और संतान सुख देने वाला है।
कन्या- बहुत अधिक कष्टकारी और मृत्यु का कारक भी बन सकता है।
तुला- अधारणीय रत्न, स्वास्य्थ एवं दुर्घटना को आमंत्रण देता है।
वृश्चिक- इस राशि के जातक के लिए मूँगा रत्न बहुत ही कल्याणकारी है, आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि करने वाला है।
धनु-  धारण योग्य रत्न है, उपयुक्त और मनोवांछित फल देने वाला है।
मकर-  इस रत्न के प्रभाव से वाहन सुख एवं संतान सुख के प्राप्ति होती है।
कुंभ-  इस राशि वालो के लिए मूँगा रत्न धारण करना वर्जित एवं हानिकारक है।
मीन-  इस राशि वालो के लिए मूँगा रत्न पुख़राज के साथ धारण करना यश एवम धन की वृद्धि करने वाला बताया।

      पन्ना रत्न का प्रभाव- 
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मेष-  इस राशि वालो के लिए  पन्ना रत्न धारण करना वर्जित माना गया है, तथा ग्रहो के बुरे प्रभाव बढ़ाने वाला      कहा गया है।
वृष-  इस राशि वालो के लिए  पन्ना रत्न धारण करना सुख समृद्धि और धन को बढ़ता है।
मिथुन-  इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना बहुत उत्तम है, तथा शारीरिक-मानसिक सुख प्रदान करने वाला है।
कर्क-  इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना अति अमंगलकारी है,तथा निश्चय ही अशुभ फल देने वाला  है।
सिंह-  इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना शुभ और समृद्धि दिलाता है।
कन्या-  इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना चमत्कारी रूप से बहुत लाभकारी है और यश और कीर्ति बढ़ाने वाला है।
तुला-   इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना उत्तम है और भाग्योदय देता है।
वृश्चिक-  इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना ज्योतिष परामर्श से तथा बुध की महादशा होने पर ही  ठीक होता है।
धनु-   इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना वर्जित माना गया है।
मकर-  इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न धारण करना उत्तम और अनिवार्य माना गया है।
कुंभ-  इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न, नीलम या हीरा रत्न के साथ धारण करना ठीक रहता है।
मीन-   इस राशि वालो के लिए पन्ना रत्न बुध की महादशा होने पर ही धारण करना अच्छा होता है।

   पुख़राज रत्न का प्रभाव- 

मेष-  इस राशि वालो के लिए पुख़राज रत्न धारण करना बहुत उत्तम है, तथा शारीरिक-मानसिक सुख प्रदान       करने वाला है।
वृष-   इस राशि वालो के लिए पुख़राज रत्न धारण करना अमंगलकारी है।
मिथुन- इस राशि वालो के लिए पुख़राज रत्न, बृहपति की महादशा होने पर ही धारण किया जा सकता है।
कर्क-   इस राशि वालो के लिए  पुख़राज रत्न धारण करना बहुत उत्तम है, यश और कीर्ति बढ़ाने वाला है।
सिंह-  इस राशि वालो के लिए पुख़राज रत्न धारण करना बहुत कल्याणकारी है।
कन्या-  इस राशि वालो के लिए पुख़राज रत्न धारण करना बहुत वर्जित माना गया, तथा विपरीत परिणाम देता है।
तुला-   इस राशि वालो के लिए रत्न धारण करना बहुत वर्जित माना गया,इससे शत्रु और रोग बढ़ते है।
वृश्चिक-  इस राशि वालो के लिए पुख़राज रत्न धारण करना बहुत कल्याणकारी, और खुशिया बढ़ाने वाला है।
धनु-  इस राशि वालो के लिए पुख़राज उत्तम है,तथा वाहन सुख बढ़ने वाला है।
मकर-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है,शारीरिक कष्ट बढ़ेंगे।
कुंभ-  इस राशि वालो के लिए ज्योतिष परामर्श से ही धारण करे अन्यथा विपरीत परिणाम मिलेंगे।
मीन-   इस राशि वालो के लिए उत्तम और अनिवार्य माना गया है।
       हीरा रत्न का प्रभाव-

मेष-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है,शारीरिक कष्ट बढ़ेंगे।
वृष-  इस राशि वालो के लिए बहुत कल्याणकारी, खुशिया बढ़ाने वाला है।
मिथुन-  इस राशि वालो के लिए उत्तम और अनिवार्य माना गया है,यश और कीर्ति बढ़ाने वाला है।
कर्क-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है, और आयु सम्बंधी परेशानिया देता है।
सिंह-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है, और आयु तथा वाहन सम्बंधी परेशानिया देता है।
कन्या-  इस राशि वालो के लिए कल्याणकारी है, सन्तान सुख की प्राप्ति भी करता है।
तुला-  इस राशि वालो के लिए बहुत कल्याणकारी,और उत्तम कहा गया है।
वृश्चिक-  इस राशि वालो के लिए रत्न धारण करना अमंगलकारी है।
धनु-  इस राशि वालो के लिए ज्योतिष परामर्श से शुक्र महादशा होने पर ही धारण करे अन्यथा विपरीत परिणाम   मिलेंगे।
मकर-  इस राशि वालो के लिए  बहुत कल्याणकारी,और उत्तम कहा गया है।
कुंभ-  इस राशि वालो के लिए  बहुत कल्याणकारी,और उत्तम कहा गया है। धन,एवं वैभव दिलाता है।
मीन-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है,कदापि धारण  नही करे।

       नीलम रत्न का प्रभाव-

मेष-  इस राशि वालो के लिए ज्योतिष परामर्श से शनि की महादशा होने पर ही धारण करे अन्यथा विपरीत   परिणाम मिलेंगे।
वृष-  इस राशि वालो के लिए कल्याणकारी,और उत्तम कहा गया,धन,एवं वैभव दिलाता है।
मिथुन-  इस राशि वालो के लिए ज्योतिष परामर्श से शनि की महादशा होने पर ही धारण करे।
कर्क-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है,कदापि धारण  नही करे।
सिंह-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है,कदापि धारण  नही करे। इससे शत्रु और रोग बढ़ेंगे।
कन्या-  इस राशि वालो के लिए  ज्योतिष परामर्श से शनि की महादशा होने पर ही धारण करे,अन्यथा स्वस्थ्य परेशानिया देगा।
तुला-  इस राशि वालो के लिए कल्याणकारी,राजयोगकारक और उत्तम कहा गया,धन,एवं वैभव दिलाता है।
वृश्चिक-  इस राशि वालो के लिए ज्योतिष परामर्श से शनि की महादशा होने पर ही धारण करे।
धनु-  इस राशि वालो के लिए वर्जित माना गया है,नीलम को कदापि धारण  नही करे।
मकर-  इस राशि वालो के लिए नीलम कल्याणकारी,और उत्तम कहा गया।
कुंभ-  इस राशि वालो के लिए कल्याणकारी,और उत्तम कहा गया, आयु और भाग्य में वृद्धि करता है।
मीन-  इस राशि वालो के लिए  वर्जित माना गया है,कदापि धारण  नही करे।

     राहु एवं केतु का प्रभाव- 

ये एक छाया ग्रह के रूप में माने गए है ,और इन रत्नों को बिना किसी ज्योतिष परामर्श के कदापि धारण नहीं करना चाहिए, अन्यथा दोनों ही कष्टकारी और भयानक फल देते है। 
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बदलेंगे घर का वास्तु तो होगी कामनाये पूरी

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घर के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स -

    वास्तु-शास्त्र, भारत के प्राचीन विज्ञान की वह शाखा जो जुडी है मानव के स्वास्थ्य,समृद्धि,और भाग्य से। वास्तु से ही हमें ये पता चलता है की कौन सी वस्तुए लाभ की है और कौन सी वस्तुएँ उपयोग करने से भाग्य क्षीण होता है, जैसे की  कौन सा पौधा लगाने से बरक़त बढ़ेगी और कौन सी दिशा में परिवर्तन करने से हानि हो सकती है। 
तो आइये जानते है ऐसे ही कुछ उपयोगी वास्तु टिप्स के बारे में-
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  •  घर में पूजा-पाठ के स्थान लिए ईशान अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा सबसे उत्तम होती है। और साथ ही पूजा घर के ऊपर या निचे कभी भी शौचालय नहीं होना चाहिए। तथा पूजा के लिए स्थापित की गई मूर्ती की विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा नहीं करनी चाहिए,क्योंकि इस प्रकार स्थापित की गई मूर्ती की दैनिक पूजा उस विधान से हर दिन संभव नहीं हो पाती। 
  • घर के प्रधान(मुखिया) का कमरा या तो उत्तर-पश्चिम में बना हो या  तो दक्षिण-पश्चिम दिशा में। 
  • गेस्ट-रूम को उत्तर-पूर्व दिशा में बनाना उचित रहता है। किन्तु ध्यान रखे कि इस दिशा में घर के किसी सदस्य का बेडरूम न बना हो। 
  • रसोई-घर के लिए पूर्व-दक्षिण दिशा सबसे सर्वश्रेष्ठ कही गयी है। 
  • शौचालय के लिए उचित दिशा दक्षिण-पश्चिम है। 
  • घर में बनाई गई सीढ़ियों की संख्या यदि विषम हो तो सबसे उत्तम रहता है। और सीढ़ियों के लिए पश्चिम दिशा निर्धारित की गयी है। 
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  • कमरे की लाइट फ़िटिंग उत्तर या पूर्व दिशा में लगवानी चाहिए। 
  • घर के प्रवेश-द्वार पर एक बड़ा सा स्वस्तिक का चिन्ह अवश्य बनाना चाहिए। 
  • अपने बेडरूम में कभी भी धर्म-आस्था से जुड़ी तस्वीरें नहीं लगनी चाहिए, और ना ही अपने घर में जानवरो की तस्वीरे कही भी लगनी चाहिए। 
  • लव-बर्ड्स के शोपीस या तस्वीर लगाने से घर के सदस्यो में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। 
  • क्रिस्टल बॉल का सम्बन्ध स्वस्थ्य से होता है, अतः इसे भी अपने घर में टांगना अच्छा होता है। 
  • अपने घर के उत्तर-पूर्वी दिशा में पानी से भरा कलश रखने से कभी भी घर में धन की समस्या नहीं होती। 
  • घर के मुख्य ड्राइंग रूम में गुलदस्ता रखने से परिवार में कलह की स्थिति कभी नहीं बनती। 

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